अध्याय 3

एक सुरक्षित शहर के हमारे सपने को वास्तविकता में बदलना

भारत सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निर्भया फंड का 46% निगरानी और पुलिसिंग कार्यों के लिए आवंटित किया गया है। हमने सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला अधिकार समूहों और ट्रांस-क्वीयर कार्यकर्ताओं से पूछा, 'क्या यह आवंटन महिलाओं और जेंडर अल्पसंख्यकों की ज़रूरतों को दर्शाता है?'

उत्तर जोरदार 'नहीं' था। तो, एक सुरक्षित शहर की उनकी कल्पना से मेल खाने वाले सार्वजनिक स्थान बनाने के लिए सरकारी धन कहाँ आवंटित किया जाना चाहिए? लोगों ने जो कहा उससे पता चलता है कि सार्वजनिक सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है जिसके लिए शहरों को सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न संस्थाओं और समूहों को एक साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है।

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1. नागरिक बुनियादी ढांचे को बेहतर (अपग्रेड) करना

2. जन जागरूकता और पुलिस संवेदनशीलता का विस्तार करना

3. उत्तरजीवी (सरवाइवर) केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल और परामर्श प्रदान करना

4. रिपोर्टिंग तंत्र को मज़बूत करना

5. कानूनी हस्तक्षेप को मज़बूत करना

6. सिविल सोसाइटी संगठनों को फ़ंड देना

— क्या आप सुरक्षित शहरों के लिए आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं?

यहाँ मुंबई और कोलकाता में स्थित कुछ ज़मीनी स्तर के संगठन हैं, जो यौनिकता, जाति, धर्म, विकलांगता और श्रम के अंतरसंबंधों (इंटरसेक्शन्स) में सिसजेंडर महिलाओं और ट्रांस/क्वीयर समुदायों के लिए इन शहरों को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके बारे में और पढ़ें, उनको फॉलो करें, उनके काम में शामिल हों और/या समर्थन के लिए उनसे संपर्क करें।

मुंबई

जेंडर, टेक्नालजी और यौनिकता के अंतर्संबंधों (इंटरसेक्शन्स) को जानने के लिए pointofview.org पर जाएँ और हमारे न्यूज़लैटर को फ़ॉलो करें। अगर आपको अपने फ़ोन पर डिजिटल निगरानी के लिए सहायता की ज़रूरत है, तो टेकसाखी (TechSakhi) को 080 4568 5001 पर कॉल करें।
सेफसिटी (Safecity) पर यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट करें और अपने शहर को महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित बनाएं! सेफसिटी प्लेटफ़ॉर्म डाउनलोड करें या https://webapp.safecity.in/ पर जाएँ। समस्या समाधान में समुदायों को शामिल करने तथा नीतियों और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए नागरिक और पुलिस अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के लिए जानकारी का विश्लेषण किया जाता है। आपकी जानकारी गुमनाम रहती है।
हसरत-ए-जिंदगी मामूली हसरत-ए-जिंदगी मामूली मुंबई में एक गैर-वित्तपोषित (नॉन-फंडेड) क्वीयर ट्रांस नारीवादी समूह (फेमिनिस्ट कलेक्टिव) है। यह क्वीयर और ट्रांस लोगों की वो जो हम हैं वही बने रहने की स्वतंत्रता के संघर्ष का हिस्सा है। हम लोकतांत्रिक मूल्यों और सभी हिंसा से मुक्त समाज के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगर आपको मदद की ज़रूरत है तो कृपया hasratezindagimamuli@gmail.com पर हमें लिखें।
परचम (http://www.parchamcollective.org) एक मुंबई स्थित संगठन है जो फुटबॉल प्रशिक्षण, रोजगार कौशल और समावेशी सार्वजनिक स्थानों के निर्माण के माध्यम से हाशिए पर पड़े युवाओं को सशक्त बनाता है। हम रूढ़ियों को चुनौती देते हैं, समुदायों के बीच संबंध बनाते हैं और अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करते हैं। यदि आप परचम के साथ वॉलंटियर करना चाहते हैं या सहायता चाहते हैं तो कृपया parchamcollective@gmail.com पर संपर्क करें।

कोलकाता

साफ्फो फॉर इक्वालिटी (https://www.sapphokolkata.in/ ) कोलकाता में एक संगठन और एक्टिविस्ट मंच है, जो पूर्वी भारत में लेसबियन, बाईसेक्शुअल महिलाओं और ट्रांस पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करता है। हमारा काम सामुदायिक सशक्तिकरण और नागरिक समाज संगठनों के साथ जुड़ाव पर केंद्रित है। आप सहायता के लिए साफ्फो की हेल्पलाइन: 9831518320 पर कॉल कर सकते हैं।
स्वयं (https://swayam.info/) 1995 में स्थापित कोलकाता स्थित नारीवादी महिला अधिकार संगठन है। स्वयं महिला सशक्तिकरण, महिला अधिकारों को आगे बढ़ाने और हिंसा मुक्त और जेंडर-न्यायपूर्ण समुदाय बनाने के माध्यम से महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में काम करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया swayam@swayam.info पर संपर्क करें।
कोलकाता आनंदम फॉर इक्वालिटी एंड जस्टिस कोलकाता आनंदम फॉर इक्वालिटी एंड जस्टिस (www.kolkataanandam.org) एक ज़मीनी स्तर का संगठन है जो ग्रामीण और शहरी पश्चिम बंगाल के रेड लाइट जिलों में लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीयर, कोथी और हिजड़ा (LGBTQKH*) लोगों के अधिकारों, सम्मान और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए काम करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया kolkataanandam@gmail.com पर लिखें।